नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) ने एक्वा लाइन पर एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन, मेट्रो की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मेट्रो सेवाओं में बाधा उत्पन्न करने के मामले में रियल एस्टेट डेवलपर एम3एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (M3M India Pvt. Ltd.) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। निगम ने कंपनी को इस मामले पर अपना स्पष्टीकरण देने के लिए तीन दिनों की समय सीमा दी है।
एनएमआरसी ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर कंपनी का जवाब प्राप्त नहीं होता है या वह संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही, हादसे के कारण हुए कुल नुकसान की भरपाई भी कंपनी से ही की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
एनएमआरसी के अनुसार, यह नोटिस सेक्टर-51 और सेक्टर-50 मेट्रो स्टेशनों के बीच हुई एक गंभीर घटना के बाद जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एम3एम के निर्माणाधीन परियोजना स्थल पर क्रेन के संचालन के दौरान एक भारी लिफ्टिंग स्लिंग (वेबिंग स्लिंग) अचानक टूट गई। यह स्लिंग हवा में लहराते हुए मेट्रो रेल के ऊपर से गुजर रही ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई) के संपर्क तार और कैंटिलीवर असेंबली में जाकर फंस गई।
इस घटना के कारण उस समय वहां से गुजर रहीं कई मेट्रो ट्रेनों के पैंटोग्राफ (जो ट्रेन को बिजली की आपूर्ति करते हैं) क्षतिग्रस्त हो गए। इसके साथ ही ओएचई के कई अन्य उपकरणों को भी भारी नुकसान पहुंचा। सुरक्षा कारणों से एक्वा लाइन पर मेट्रो के परिचालन को तुरंत रोकना पड़ा। तकनीशियनों द्वारा क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदलने और ट्रैक को सुरक्षित घोषित करने के बाद ही मेट्रो सेवाएं पुनः सामान्य हो सकीं। इस व्यवधान के कारण एनएमआरसी को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा और यात्रियों को भी काफी असुविधा हुई।

सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी का आरोप
एनएमआरसी के नोटिस में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि एम3एम प्रबंधन को सुरक्षा मानकों के प्रति पहले भी सचेत किया गया था। इस संबंध में 7 अगस्त 2025 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कंपनी की परियोजना टीम को कड़े निर्देश दिए गए थे कि किसी भी स्थिति में क्रेन का बूम मेट्रो ट्रैक के दायरे में नहीं आना चाहिए। क्रेन का संचालन केवल निर्माण स्थल की निर्धारित भौगोलिक सीमा के भीतर ही किया जाना था। इसके अलावा, क्रेन का उपयोग न होने या मौसम खराब होने की स्थिति में क्रेन के बूम को लॉक रखने के भी निर्देश थे।
निगम का कहना है कि इन लिखित निर्देशों के अलावा परियोजना प्रबंधन को कई बार मौखिक चेतावनियां भी दी गईं, लेकिन निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जाती रही।
हो सकता था बड़ा हादसा
एनएमआरसी ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। यदि स्लिंग किसी भारी मलबे या लोहे के भार को उठाते समय टूटती और चलती हुई मेट्रो, ट्रैक अथवा यात्रियों पर गिरती, तो इससे जनहानि हो सकती थी। ऐसी स्थिति में ट्रेन के पटरी से उतरने (डिरेलमेंट), बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचने और लंबे समय तक मेट्रो सेवाएं ठप रहने जैसी अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती थीं।
अगली कार्रवाई की तैयारी
मेट्रो प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम को घोर लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करार दिया है। एनएमआरसी ने स्पष्ट किया है कि कंपनी के जवाब के आधार पर आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर निगम हर्जाने की वसूली, कानूनी कार्रवाई और इस घटना के कारण उत्पन्न हुई सभी देनदारियों व लागतों की भरपाई के लिए आवश्यक न्यायिक कदम उठाएगा।



