उत्तर प्रदेश सरकार भले ही सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। दिल्ली से सटे हाई-टेक शहर नोएडा के सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल से इलाज में जानलेवा लापरवाही और दवा वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
इस गंभीर मामले की गूंज जब लखनऊ तक पहुंची, तो उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
दो डॉक्टरों की लापरवाही से भड़का आक्रोश, मामला पहुंचा NHRC
नोएडा का जिला अस्पताल पिछले कुछ समय से लगातार विवादों के साये में है। ताजा मामला दो डॉक्टरों—डॉ. असद महमूद और डॉ. अरविंद मलिक—की कथित लापरवाही से जुड़ा है। एक मरीज के इलाज में बरती गई गंभीर कोताही के कारण मामला इतना तूल पकड़ गया कि यह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया।
घटना के बाद, पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था। स्थिति को बिगड़ता देख स्थानीय पुलिस ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजी थी।

मुफ्त दवाओं पर ‘डाका’? फार्मेसी में स्टॉक हेर-फेर के आरोप
इलाज में लापरवाही का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अस्पताल के दवा काउंटर (फार्मेसी) से जुड़ी एक और गंभीर शिकायत सामने आ गई। आरोप है कि अस्पताल में सरकार की ओर से गरीब मरीजों के लिए आने वाली मुफ्त दवाइयों के स्टॉक में बड़े पैमाने पर हेर-फेर किया जा रहा है। जरूरतमंद मरीजों को टरका दिया जाता है और उन्हें दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इस नई शिकायत ने स्थानीय निवासियों और मरीजों के परिजनों के गुस्से को और भड़का दिया है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का कड़ा एक्शन
स्वास्थ्य विभाग में लगातार औचक निरीक्षण और सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाने वाले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या डॉक्टर को बख्शा नहीं जाएगा।
डिप्टी सीएम के निर्देश पर दोनों आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, दवा वितरण में हुई गड़बड़ी की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के भी आदेश दिए गए हैं।
अस्पताल प्रशासन और आरोपी डॉक्टरों का क्या है कहना?
इस पूरे मामले पर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अशोक कुमार झा ने बताया, “डिप्टी सीएम द्वारा जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक आदेश की आधिकारिक कॉपी प्राप्त नहीं हुई है। शासन का पत्र मिलते ही तत्काल एक समिति बनाकर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।”
वहीं, आरोपी चिकित्साधिकारी डॉ. असद महमूद ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने पर ही वे आगे कुछ कह पाएंगे।
दूसरे आरोपी डॉ. अरविंद मलिक ने अपने बचाव में कहा, “मुझे किसी विभागीय जांच की जानकारी नहीं है। मैं हमेशा समय पर अस्पताल आकर मरीजों का इलाज करता हूं। कुछ महीने पहले मैं किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मेडिकल लीव पर था। अस्पताल में ‘अरविंद’ नाम के कई डॉक्टर हैं, संभवत: मेरा नाम गलती से इस मामले में घसीटा गया है।”







