नोएडा। नोएडा प्राधिकरण ने महत्वाकांक्षी ‘न्यू नोएडा’ (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र – DNGIR) परियोजना की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश शासन से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद, प्राधिकरण अब जमीन लेने के लिए रूपरेखा तैयार कर रहा है।
समिति का होगा गठन, आपसी सहमति पर जोर
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) सतीश पाल ने मीडिया जानकारी दी कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए जल्द ही एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य ‘आपसी सहमति’ के आधार पर जमीन अधिग्रहित करना है, ताकि किसानों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बना रहे।
जो किसान अपनी जमीन देने के इच्छुक हैं, वे सीधे प्राधिकरण के भूलेख विभाग से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों की सुविधा और जानकारी के लिए विभिन्न गांवों में विशेष शिविर (Camps) भी आयोजित किए जाएंगे, जहां अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेजी कार्यवाही पूरी की जा सकेगी।
मुआवजा और बुनियादी ढांचा
प्राधिकरण ने इस परियोजना के लिए मुआवजे की दर लगभग 4,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की है। परियोजना के सुचारू संचालन और स्थानीय स्तर पर निगरानी के लिए न्यू नोएडा क्षेत्र में ही एक अस्थायी कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा। इससे स्थानीय निवासियों और किसानों को अपनी समस्याओं या दावों के निस्तारण के लिए नोएडा मुख्य कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
परियोजना का स्वरूप और विस्तार
न्यू नोएडा परियोजना को एक वृहद औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। यह पूरी परियोजना लगभग 20,911 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली होगी और इसे कुल चार चरणों में विकसित किया जाएगा। मास्टर प्लान-2041 के तहत इस क्षेत्र में औद्योगिक, आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत क्लस्टर विकसित किए जाने की योजना है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र में रोजगार और निवेश के व्यापक अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू नोएडा के अस्तित्व में आने से न केवल एनसीआर (NCR) के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। फिलहाल, प्राधिकरण का पूरा ध्यान समयबद्ध तरीके से जमीन अधिग्रहण के प्रथम चरण को संपन्न करने पर है।


