नोएडा। भारतीय राजनीति में एक पुरानी कहावत और फिल्म ‘3 ईडियट्स’ का वह मशहूर डायलॉग कि “दोस्त फेल हो जाए तो दुख होता है, लेकिन अगर टॉप कर जाए तो और ज्यादा दुख होता है,” इन दिनों गौतम बुद्ध नगर के राजनीतिक परिवेश में सटीक बैठता नजर आ रहा है। जिले के सबसे पुराने और कद्दावर भाजपा नेताओं में शुमार नवाब सिंह नागर को भाजपा का क्षेत्रीय अध्यक्ष (पश्चिम क्षेत्र) नियुक्त किया गया है, लेकिन इस बड़ी उपलब्धि के बाद जिले के भीतर जो उत्साह दिखना चाहिए था, वह नदारद है।
अपेक्षित उत्साह का अभाव
नवाब सिंह नागर ने भाजपा के सबसे पहले मंडल अध्यक्ष से लेकर क्षेत्रीय अध्यक्ष तक का लंबा सफर तय किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि गुर्जर बहुल इस जिले में उनकी इस नियुक्ति पर जोरदार जश्न होगा, जगह-जगह पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया जाएगा और ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देगी। हालांकि, नियुक्ति के तीन दिन बीत जाने के बाद भी ऐसा कोई बड़ा घटनाक्रम जिला स्तर पर देखने को नहीं मिला है, पुरे पश्चिम की बात तो आगे की है ।
बधाई देने वालों की सीमित संख्या
घटनाक्रम पर नजर डालें तो नवाब सिंह नागर को उनके आवास पर जाकर बधाई देने वालों में मुख्य रूप से सांसद डॉ. महेश शर्मा ही नजर आए। इसके अलावा, उनके शहरी क्षेत्र के कुछ समर्थकों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसके विपरीत, नवाब सिंह नागर स्वयं नोएडा विधायक पंकज सिंह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, धर्मपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर से मिलने जाते दिखाई दिए।
हैरानी की बात यह है कि जिले में सक्रिय विभिन्न ‘गुर्जर सभाओं’ और सामाजिक संगठनों की ओर से इस बड़ी ताजपोशी पर अब तक कोई खास प्रतिक्रिया या उत्साहजनक संदेश सामने नहीं आया है।

सहयोगियों की बेरुखी और भविष्य पर सवाल
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या नवाब सिंह नागर की अपने ही समाज और स्थानीय नेताओं के बीच स्वीकार्यता कम हो रही है? बात केवल सामाजिक संगठनों तक ही सीमित नहीं है; उनके पुराने सहयोगी भी इस समय शांत नजर आ रहे हैं। नोएडा में ‘DND टोल फ्री’ कराने के आंदोलन में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले भाजपा नेता कैप्टन विकास गुप्ता की ओर से भी पिछले तीन दिनों में कोई सार्वजनिक मिलन देखने को नहीं मिला है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में झलकी मायूसी
हाल ही में मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम के दौरान नवाब सिंह नागर के हाव-भाव भी चर्चा का केंद्र रहे। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि उनके चेहरे पर वह स्वाभाविक मुस्कान नहीं थी, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। चेहरे पर छाई मायूसी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि शायद वह स्वयं भी इस ठंडी प्रतिक्रिया से वाकिफ हैं।
भाजपा के लिए चुनावी चुनौती?
नवाब सिंह नागर को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाने के पीछे भाजपा का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर समाज को साधना और संगठन को मजबूती प्रदान करना है। लेकिन यदि अपने ही गृह जनपद में उन्हें अपेक्षित समर्थन और सहयोग नहीं मिल रहा है, तो आगामी चुनावों में वह पूरे पश्चिम क्षेत्र में पार्टी की रणनीति को कैसे सफल बनाएंगे, यह एक बड़ा प्रश्न है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नवाब सिंह नागर अपने पुराने साथियों और समाज के नेताओं को साथ लाने में सफल होते हैं, या यह ‘खामोशी’ उनके राजनीतिक भविष्य और भाजपा के चुनावी समीकरणों पर कोई नया प्रभाव डालेगी।



